राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार

 

22 बच्चों को राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार, जानें- जांबाज बच्चों की बहादुरी की कहानियाँ

वीरता पुरस्कारों के लिए जिन 22 बच्चों को चुना गया है, उनमें से हर एक की कहानी प्रेरणा देने वाली है। किसी ने दोस्तों को बचाने में अपनी जान गंवा दी तो किसी बच्ची ने हादसे में पूरे परिवार को बचा लिया। आइए जानते हैं बालवीरों की कहानी...


मरकर भी डूब रहे तीन दोस्तों को बचा लिया
केरल के कोझीकोड के रहने वाले मुहम्मद मुहसिन ने समुद्र में बहते अपने दोस्तों को बचाने के लिए जान गंवा दी। उन्हें मरणोपरांत वीरता पुरस्कार के लिए चुना गया है। उनके अलावा कई ऐसे बच्चे हैं, जिन्होंन अपनी जान को खतरे में डालकर दूसरों को जीवन दिया।

बच्ची ने बचाई माता-पिता और दादा की जान
22 बच्चों में से 10 लड़कियों को भी इस पुरस्कार के लिए चुना गया है। बेटियों की बहादुरी की कहानी सुनाते हुए कई पैरेंट्स बेहद भावुक हो गए। ऐसी ही एक बेटी हैं हिमाचल प्रदेश की अलाइका। महज 13 साल की अलाइका उस वक्त अपने माता, पिता और दादा के लिए फरिश्ता बन गईं, जब उनकी कार अचानक रोड से नीचे खाई में गिरने लगी। अलाइका की मां सविता बताती हैं, 'हम एक बर्थडे पार्टी में जा रहे थे। पालमपुर के पास हमारी कार अचानक खाई में जाने लगी। किस्मत अच्छी थी कि एक पेड़ के तने से टकराकर वह रुक गई। इस हादसे के बाद अलाइका सबसे पहले होश में आई और लोगों को मदद के लिए बुलाया। यदि वह न होती तो आज हम लोग जिंदा न बचते।'

जलती बस से 42 लोगों को बचाया
अलाइका जैसा ही हादसा आदित्य के. के साथ भी हुआ था। बीते साल एक मई को 15 साल के आदित्य केरल के 42 अन्य पर्यटकों के साथ नेपाल की यात्रा से लौट रहे थे। भारतीय सीमा से करीब 50 किलोमीटर पहले बस में आग लग गई। आग लगते ही ड्राइवर मौके से फरार हो गया, जबकि 5 बच्चों और कुछ बुजुर्गों समेत तमाम यात्री बदहवास थे। बस के दरवाजे बंद थे। इस बीच आदित्य ने हथौड़े से बस का पिछला शीशा तोड़ दिया। इस दौरान उनके हाथ और पैरों में शीशे से चोटें भी लगीं। आदित्य की यह वीरता ही थी कि बस के डीजल टैंक के फटने से पहले सभी यात्री निकल पाए।

अशरफ ने हेलिकॉप्टर क्रैश में चलाया बचाव अभियान
पिछले साल 27 फरवरी को भारतीय वायुसेना का MI-17 हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया था। बडगाम में हुए इस हादसे के बाद मौके पर पहुंचने वाले लोगों में 18 साल के अशरफ भी थे। उन्होंने उस मलबे में एक व्यक्ति को जिंदा देखा। इसके बाद अपनी जान पर खेलकर घायल शख्स को निकाला। हालांकि उनकी जान नहीं बच सकी। इसके बाद घटनास्थल पर पहुंची एनडीआरएफ की टीम के साथ भी वह बचाव कार्य में जुटे रहे।
इन्हें भी मिलेगा बहादुरी का पुरस्कार
पुरस्कार पाने वाले अन्य बच्चों में असम के मास्टर श्री कमल कृष्ण दास, छत्तीसगढ़ की कांति पैकरा और वर्णेश्वरी निर्मलकर, कर्नाटक की आरती किरण सेठ औरवेंकटेश, केरल के फतह पीके, महाराष्ट्र की जेन सदावर्ते और आकाश मछींद्र खिल्लारे को दिया जाएगा। इसके अलावा मिजोरम के तीन बच्चों और मणिपुर व मेघालय से एक एक बच्चों को वीरता पुरस्कार के लिए चुना गया है।





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