पहली बारिश- भाष अभ्यास

पहली बारिश- भाष अभ्यास

1.कौन क्या कर रहा है
राज मिस्त्री - दीवार बना रहा है
गाय - घास चबा रही है
झबरू - आँख मूँदकर गाय के पास लेटा है
2.क्रिया शब्द
चबा रही है          गई थी       कोसा
3.कालू कुत्ता
रीमा चाची
गीता दीदी
चम्पा गाय

4.पर्यायवाची शब्द
चाँद - चंद्रमा शशि
फूल - सुमन पुष्प
पानी - जल नीर
तालाब - सरोवर ताल
5.सही जगह पर चंद्रबिंदु लगाइयए-
उँचे आँगन माँ झाड़ियाँ दाँत मुँह
6.लिंग बदलो
चूहा चुहिया
गाय बैल
मोर मोरनी
लड़की लड़का
7.वचन बदलो
कपड़ा कपडे
टाँग टाँगें
आँख आँखें
घड़ा घड़े
8.      विशेषण          विशेष्य
क)     सूखे                कपड़े
ख)     काले               बादल
ग)     टूटी-फूटी          खाट
घ)     ऊँचे                  सुर

9.युग्म शब्द
बूँदा बाँदी
घास फूस
इधर उधर
लंबी चौड़ी
जल्दी जल्दी
धीरे धीरे
10 चित्र लेखन
यह चित्र बरसात के मौसम का है।  आसामान में काले बादल छाए हुए हैं और तेज़ हारिश हो रही है। बच्चे बारिश में भीग रहे हैं और खेल भी रहे हैं। वे बारिश में भीगकर आनंद ले रहे हैं। एक लड़की छतरी पकड़ कर नाच रही है।काले बदलों को देखकर मोर नाच रहा है। मेंढक पत्ते के नीचे बैठकर  टर्र-टर्र की आवाज़ कर रहा है।बच्चों को बारिश के पानी में ज़्यादा भीगना नहीं चाहिए।

DAV PUBLIC SCHOOL ,CSPUR ,BBBSR-21
WORKSHEET- 6 पहली बारिश
CLASS – IV
NAME -------------------------------          SEC ------ ROLL NO  -------
विकल्पों मेँ से सही उत्तर पर निशान लगाओ
1.रस्सी पर क्या  लटक रहे थे?
कुर्ता,        कपड़े,        कागज़,       कपड़ा
2.राज मिस्त्री जी को क्या ठीक करना था?
छाज्जा,      घर,         दीवार,       छज्जा
3.खतरू किसका नाम था?
अम्मा,             गाय,         कुत्ता,       मोची
4.किसने बारिश को कोसा?
अम्मा,             गाय,         खतरू,       सबने
5.मैदनों में बच्चों ने क्या किया?
खेला,        छलाँगें मारी,   दौड़े,         नहाए
6. लिंग बदलो-
चुहिया -  --------------------
बैल-  --------------------
मोरनी -  --------------------
लड़का -  --------------------
धोबिन -  --------------------

सफ़दर हाशमी की रचित कविता - किताबें कुछ कहना चाहती हैं

https://www.youtube.com/watch?v=jkcVxTmMf9w

किताबें / सफ़दर हाशमी

किताबें करती हैं बातें
बीते जमानों की
दुनिया की, इंसानों की
आज की कल की
एक-एक पल की।
खुशियों की, गमों की
फूलों की, बमों की
जीत की, हार की
प्यार की, मार की।
सुनोगे नहीं क्या
किताबों की बातें?
किताबें, कुछ तो कहना चाहती हैं
तुम्हारे पास रहना चाहती हैं।
किताबों में चिड़िया दीखे चहचहाती,
कि इनमें मिलें खेतियाँ लहलहाती।
किताबों में झरने मिलें गुनगुनाते,
बड़े खूब परियों के किस्से सुनाते।
किताबों में साईंस की आवाज़ है,
किताबों में रॉकेट का राज़ है।
हर इक इल्म की इनमें भरमार है,
किताबों का अपना ही संसार है।
क्या तुम इसमें जाना नहीं चाहोगे?
जो इनमें है, पाना नहीं चाहोगे?
किताबें कुछ तो कहना चाहती हैं,
तुम्हारे पास रहना चाहती हैं!


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