'उलटा-पुलटा' कविता का सारांश
भगवती प्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित यह कविता 'उलटा-पुलटा' हमें जीवन में निरंतर आगे बढ़ने और साहस न हारने की प्रेरणा देती है। कवि ने छिपकली, बंदर, चींटी और गिरगिट जैसे जीवों का उदाहरण देकर समझाया है कि गिरने के बाद वे बिना समय गँवाए तुरंत संभल जाते हैं। ये जीव गिरने पर पछताते नहीं हैं, बल्कि अपनी धूल झाड़कर दोबारा चलने की हिम्मत जुटा लेते हैं। लेखक के अनुसार, जो व्यक्ति असफलता से घबराकर हिम्मत खो देते हैं, वे हमेशा दुखी रहते हैं। इसके विपरीत, बाधाओं का सामना कर खुद को संभालने वाले लोग ही जीवन में असली सुख और सफलता प्राप्त करते हैं।
कठिन शब्द और उनके अर्थ
- क्षण: पल (समय का एक बहुत छोटा हिस्सा)
- झटपट: एकदम या तुरंत
- साहस: हिम्मत या हौसला
- एकाएक: अचानक
- हिम्मत: साहस या धैर्य
- पछताना: किसी बात पर दुख या अफ़सोस करना
- पिछड़ना: पीछे रह जाना
- तुरंत: उसी समय या जल्दी
- सँभलना: गिरने से खुद को बचा लेना
- सुख: आनंद या खुशहाली
कविता के अनुसार, जो लोग गिरने या पिछड़ने पर हिम्मत नहीं हारते और
धूल झाड़कर तुरंत सँभल जाते हैं, वही जीवन में सुख पाते हैं।
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